
विजय कुमार बंसल हरिद्वार ब्यूरो
श्री चंदन कृष्ण महाराज का दीक्षा दिवस बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ संत भंडारे के रूप में मनाया गया
हरिद्वार श्री चन्दन कृष्ण महाराज का दीक्षा दिवस श्रद्धा, भक्ति और संत समागम के साथ भव्य रूप से सम्पन्नआज खड़ीखड़ी रेलवे फाटक से पूर्व स्थित श्री चन्दन देव आश्रम में श्री चन्दन कृष्ण महाराज का दीक्षा दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ भव्य रूप से मनाया गया। इस पावन अवसर पर महंत श्री प्रेमदास जी महाराज के पावन सानिध्य में विशाल संत समागम का आयोजन हुआ, जिसमें दूर-दूर से आए संत-महात्माओं, भक्तजनों तथा श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर गुरु-भक्ति और संत परंपरा का अनुपम दर्शन किया। आश्रम परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, गुरु वंदना और भजन-कीर्तन के साथ हुआ। इसके उपरांत संत-महात्माओं ने गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही वह प्रकाश हैं जो शिष्य के जीवन से अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करते हैं। गुरु के बिना जीवन की दिशा और दशा दोनों अधूरी रहती हैं।इस अवसर पर महंत श्री प्रेमदास जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध केवल ज्ञान देने और लेने का नहीं, बल्कि आत्मा से आत्मा के जुड़ाव का पवित्र संबंध है। गुरु शिष्य को केवल मार्ग नहीं दिखाते, बल्कि उसे सत्य, सेवा, त्याग और साधना का वास्तविक अर्थ भी समझाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस शिष्य के हृदय में गुरु के प्रति समर्पण, श्रद्धा और विश्वास होता है, उसका जीवन स्वतः ही सफल और सार्थक हो जाता है। गुरु की कृपा से ही साधक अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करता है।उन्होंने आगे कहा कि गुरु का सानिध्य जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है, क्योंकि गुरु ही मनुष्य को मानवता, करुणा, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। गुरु का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है, जो हर कठिनाई में साधक को संभालता और आगे बढ़ाता है।
दीक्षा दिवस के इस पावन अवसर पर संत समागम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की तथा आशीर्वाद प्राप्त किया। भजन, सत्संग और प्रसाद वितरण के साथ यह आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। पूरे क्षेत्र में इस आयोजन की भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा की विशेष चर्चा रही। इस अवसर पर महंत मोहन सिंह महंत राघवेंद्र दास महाराज महंत कृष्ण देव जी महाराज महंत राजरानी महाराज महंत नागा बाबा गजेंद्र गिरी महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज कोतवाल श्याम गिरी महाराज महंत शुक्र गिरी महाराज कोतवाल रामदास महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे








